इंदौर के मल्हार आश्रम स्थित Sports Authority of India (SAI) सेंटर में खिलाड़ियों को बेहतर खेल प्रशिक्षण के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

इंदौर: शहर का मल्हार आश्रम लंबे समय से कुश्ती प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है, लेकिन इस समय यहां प्रशिक्षण लेने वाले युवा पहलवानों के सामने खेल सुविधाओं से जुड़ी गंभीर चुनौतियां सामने आ रही हैं।
Times of India की 21 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, अर्जुन पुरस्कार प्राप्त कुश्ती कोच कृपा शंकर बिश्नोई के प्रशिक्षण केंद्र में बारिश के दौरान पानी भरने की समस्या सामने आई है। खिलाड़ियों को अभ्यास शुरू करने से पहले अखाड़े में जमा पानी हटाना पड़ता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मल्हार आश्रम स्थित SAI सेंटर में 2008 से 80 से अधिक पहलवान प्रशिक्षण ले रहे हैं। यहां खिलाड़ियों को निशुल्क प्रशिक्षण मिलता है। लेकिन भवन की खराब स्थिति, छत से पानी टपकना और दीवारों से प्लास्टर गिरने जैसी समस्याएं प्रशिक्षण को प्रभावित कर रही हैं।
खेल शिक्षा के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मामला?
किसी भी खिलाड़ी के विकास में कोचिंग के साथ-साथ सुरक्षित और नियमित प्रशिक्षण वातावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अगर अभ्यास स्थल बारिश या दूसरी बुनियादी समस्याओं के कारण नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं हो पाए, तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण की निरंतरता प्रभावित हो सकती है।
महिला पहलवानों के लिए भी सुविधाओं से जुड़ी अलग चुनौती सामने आई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सेंटर में उचित चेंजिंग रूम नहीं है और शौचालयों की स्थिति भी खराब है।
इससे यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत में खेल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर विकसित करने के लिए कोचिंग, मैदान, उपकरण, स्वच्छता और सुरक्षा—इन सभी पहलुओं को एक साथ कितना महत्व दिया जा रहा है।
युवाओं के लिए सीख
खेल में सफलता केवल प्रतिभा से नहीं आती। नियमित अभ्यास, सही मार्गदर्शन, अनुशासन और सुरक्षित प्रशिक्षण वातावरण भी उतने ही जरूरी हैं।
इंदौर जैसे शहर में जहां कुश्ती की पुरानी परंपरा रही है, वहां प्रशिक्षण केंद्रों का रखरखाव युवा खिलाड़ियों के भविष्य से सीधे जुड़ा विषय बन जाता है।
निष्कर्ष:
मल्हार आश्रम की स्थिति खेल शिक्षा के उस महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाती है जिसमें प्रतिभा को अवसर देने के साथ-साथ उसे विकसित करने के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है।

